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Saturday, 5 May 2018

माँ की ममता .....

माँ की ममता .....   
         




हजारो फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए,
हजारों दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए
हजारों बून्द चाहिए समुद्र बनाने के लिए,
पर “माँ “अकेली ही काफी है
बच्चो की जिन्दगी को स्वर्ग बनाने के लिए..!!              





                                                      

हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है

हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा 
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है                                    



                                                                  
माँ ना होती तो वफ़ा कौन करेगा,

ममता का हक़ भी कौन अदा करेगा,
रब हर एक माँ को सलामत रखना,
वरना हमारे लिए दुआ कौन करेगा.

                                                   


सबकुछ मिल जाता है दुनिया में मगर,

याद रखना की बस माँ-बाप नहीं मिलते,
मुरझा कर जो गिर गए एक बार डाली से,
ये ऐसे फूल हैं जो फिर नहीं खिलते।























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